विश्व हिंदी दिवस: भाषा, संस्कृति और वैश्विक पहचान
विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना तथा उसकी सांस्कृतिक, साहित्यिक और बौद्धिक महत्ता को विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करना है। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसमें अनेक देशों के विद्वानों और साहित्यकारों ने भाग लिया था।
हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और यह करोड़ों लोगों की मातृभाषा, संपर्क भाषा और भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है। हिंदी ने भारत की राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साहित्य, कविता, कथा, नाटक और पत्रकारिता के क्षेत्र में हिंदी का योगदान अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है।
आज के आधुनिक और डिजिटल युग में हिंदी का दायरा निरंतर विस्तृत हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप्स, ई-गवर्नेंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में हिंदी की उपस्थिति मजबूत होती जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हिंदी न केवल परंपरागत भाषा है, बल्कि समय के साथ विकसित होती एक आधुनिक और सक्षम भाषा भी है।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर भारत तथा विदेशों में साहित्यिक गोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक और प्रेरित किया जाता है।
अतः विश्व हिंदी दिवस हमें यह संदेश देता है कि हम हिंदी का गौरवपूर्ण प्रयोग करें, उसका संरक्षण करें और वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करें। हिंदी के विकास से ही हमारी सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत सुरक्षित रह सकती है।

No comments:
Post a Comment