Monday, February 2, 2026

READING PROMOTION WEEK -3


पठन प्रोत्साहन सप्ताह 

 पठन प्रोत्साहन सप्ताह के अंतर्गत विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि विकसित करने हेतु चयनित गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इस दौरान पठन के महत्व को दर्शाने हेतु विद्यार्थियों द्वारा एक प्रभावशाली नाटक (स्किट) प्रस्तुत किया गया, जिससे पुस्तकों के जीवन में महत्व को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया गया। कक्षा 6 के विद्यार्थियों के बीच हस्तलेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने सुंदर एवं स्पष्ट लेखन का प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त कविता पाठ  आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास के साथ भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति दी। साथ ही विद्यार्थियों के ज्ञान एवं पठन-समझ को परखने हेतु प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में पठन के प्रति उत्साह एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हुआ।
















Thursday, January 15, 2026

 

भारतीय सेना दिवस: निःस्वार्थ सेवा, साहस और मानवता का प्रतीक



भारतीय सेना दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन हमारे देश की भारतीय थल सेना को सम्मान देने का अवसर है, जो दिन-रात सीमाओं की रक्षा करते हुए देश की एकता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा ने भारतीय सेना के प्रथम भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इसी ऐतिहासिक स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।

भारतीय सेना केवल हथियारों और युद्धक रणनीतियों की पहचान नहीं है, बल्कि यह त्याग, अनुशासन, कर्तव्य और मानवता की जीवंत मिसाल है। जब हम सुरक्षित अपने घरों में सोते हैं, तब हमारे सैनिक बर्फीली चोटियों, तपते रेगिस्तानों और घने जंगलों में देश की रक्षा में तैनात रहते हैं। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा होता है, फिर भी उनके चेहरे पर देश के प्रति गर्व और सेवा का भाव झलकता है।

युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप, महामारी और राहत कार्यों में भी भारतीय सेना सबसे पहले मदद के लिए आगे आती है। संकट में फँसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना, भोजन और दवाइयाँ पहुँचाना—ये सभी कार्य सेना के मानवीय पक्ष को दर्शाते हैं। यही कारण है कि भारतीय सेना देशवासियों के दिलों में विशेष स्थान रखती है।

भारतीय सेना दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि स्वतंत्रता और शांति कितनी कीमती हैं और इन्हें बनाए रखने के लिए कितने परिवार अपने प्रियजनों को देश सेवा के लिए समर्पित करते हैं। यह दिन केवल परेड और सम्मान का नहीं, बल्कि कृतज्ञता और संवेदना व्यक्त करने का दिन है।

पुस्तकालय के रूप में हमारा दायित्व है कि हम युवाओं को सेना के इतिहास, वीरता गाथाओं और मूल्यों से परिचित कराएँ, ताकि उनमें देशभक्ति, जिम्मेदारी और मानवता की भावना विकसित हो।
भारतीय सेना दिवस हमें याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि सेवा, बलिदान और मानवीय मूल्यों में निहित होती है।





Saturday, January 10, 2026

 विश्व हिंदी दिवस: भाषा, संस्कृति और वैश्विक पहचान





विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना तथा उसकी सांस्कृतिक, साहित्यिक और बौद्धिक महत्ता को विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करना है। यह दिन 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसमें अनेक देशों के विद्वानों और साहित्यकारों ने भाग लिया था।

हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है और यह करोड़ों लोगों की मातृभाषा, संपर्क भाषा और भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है। हिंदी ने भारत की राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साहित्य, कविता, कथा, नाटक और पत्रकारिता के क्षेत्र में हिंदी का योगदान अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायक रहा है।

आज के आधुनिक और डिजिटल युग में हिंदी का दायरा निरंतर विस्तृत हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप्स, ई-गवर्नेंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में हिंदी की उपस्थिति मजबूत होती जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि हिंदी न केवल परंपरागत भाषा है, बल्कि समय के साथ विकसित होती एक आधुनिक और सक्षम भाषा भी है।

विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर भारत तथा विदेशों में साहित्यिक गोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को हिंदी भाषा के प्रति जागरूक और प्रेरित किया जाता है।

अतः विश्व हिंदी दिवस हमें यह संदेश देता है कि हम हिंदी का गौरवपूर्ण प्रयोग करें, उसका संरक्षण करें और वैश्विक स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करें। हिंदी के विकास से ही हमारी सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत सुरक्षित रह सकती है।