Thursday, January 15, 2026

 

भारतीय सेना दिवस: निःस्वार्थ सेवा, साहस और मानवता का प्रतीक



भारतीय सेना दिवस प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन हमारे देश की भारतीय थल सेना को सम्मान देने का अवसर है, जो दिन-रात सीमाओं की रक्षा करते हुए देश की एकता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के. एम. करिअप्पा ने भारतीय सेना के प्रथम भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया था। इसी ऐतिहासिक स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है।

भारतीय सेना केवल हथियारों और युद्धक रणनीतियों की पहचान नहीं है, बल्कि यह त्याग, अनुशासन, कर्तव्य और मानवता की जीवंत मिसाल है। जब हम सुरक्षित अपने घरों में सोते हैं, तब हमारे सैनिक बर्फीली चोटियों, तपते रेगिस्तानों और घने जंगलों में देश की रक्षा में तैनात रहते हैं। उनका जीवन कठिनाइयों से भरा होता है, फिर भी उनके चेहरे पर देश के प्रति गर्व और सेवा का भाव झलकता है।

युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूकंप, महामारी और राहत कार्यों में भी भारतीय सेना सबसे पहले मदद के लिए आगे आती है। संकट में फँसे नागरिकों को सुरक्षित निकालना, भोजन और दवाइयाँ पहुँचाना—ये सभी कार्य सेना के मानवीय पक्ष को दर्शाते हैं। यही कारण है कि भारतीय सेना देशवासियों के दिलों में विशेष स्थान रखती है।

भारतीय सेना दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि स्वतंत्रता और शांति कितनी कीमती हैं और इन्हें बनाए रखने के लिए कितने परिवार अपने प्रियजनों को देश सेवा के लिए समर्पित करते हैं। यह दिन केवल परेड और सम्मान का नहीं, बल्कि कृतज्ञता और संवेदना व्यक्त करने का दिन है।

पुस्तकालय के रूप में हमारा दायित्व है कि हम युवाओं को सेना के इतिहास, वीरता गाथाओं और मूल्यों से परिचित कराएँ, ताकि उनमें देशभक्ति, जिम्मेदारी और मानवता की भावना विकसित हो।
भारतीय सेना दिवस हमें याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि सेवा, बलिदान और मानवीय मूल्यों में निहित होती है।

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